जादू-टोने से बचने की दुआ 5/5 (9)

जादू-टोने से बचने की दुआ

Jadu Tone Se Bachne Ki Dua

जादू-टोने से बचने की दुआ – Jadu Tone Se Bachne Ki Dua, अक्सर सुना जाता है कि किसी के बीमार होने पर वह ठीक नहीं हो पा रहा है। जबकि उसका शहर के बेहतरीन डाक्टर इलाज कर रहे हैं। बीमारी पकड़ में नहीं आ रही है। उसे बुरे-बुरे सपने आ रहे हैं।

इत्तेफाकन एक ही तरह के सपने परिवार में कई सदस्यों को आने की शिकायत मिलती है। इसके कारण के तौर पर यही कहा जाता है कि उसे ऊपरी हवा लग गई है। किसी ने उस पर जादू-टाना कर दिया है। ऐसे व्यक्ति को रूहानी उपचार की जरूरत होती है। दवा की वजाय दुआ से वह ठीक होता है।

जादू-टोने से बचने की दुआ

जादू-टोने से बचने की दुआ

इस्लामी किताबों में इस बात का जिक्र किया गया है कि यदि कोई जादू टोने-टोटके के कारण अजीबो-गरीब हरकतें करता हो। वह डरा-डरा सा रहता हो। अगर वह कोई कुंवारी युवती है तो उसे किसी कंे द्वारा सोई अवस्था में बाल खींचने के सपने आते हों या फिर किसी विवाहिता को अज्ञात साए द्वारा बार-बार सहवास करने के सपने आ रहे हों।

इस हालत में उसके भीतर किसी के प्रति घृणा या किसी के प्रति अचानक प्रेम पैदा हो गया हो जाए तो इसमें घबड़ाने की जरूरत नहीं है। उसे सामान्य स्थिति में लाने के लिए उसका नुकसान पहुंचाए बगैर र्कुआन और हदीस से कई तरह की दुआयें बताई गई हैं। यानी कि इस्लाम में किसी भी तरह के जादू का तोड़ सिर्फ जुबान से निकाला गया है। आइए एक नजर उनपर डालते हैं।

हाजिरातः एक रूहानी अमल

मौलवी जादू-टोने को बेअसर करने के लिए हाजिरात का एक आसान अमल करते हैं। इसके लिए किसी साधना की या नियमों के किसी कठोर बंधन की जरूरत नहीं होती है। बस अमल करने वाले का दिल पाक और नीयत खालिस होना चाहिए। साथ ही वह हाजिरात के अमल का तरीका जानता हो।

इसमें न्याया और सजा की बातें होती है। हाजिरात के मौअक्कलों से अदब से बात करनी पड़ती है। जादू के शैतानों या कहें जिन्नतों को पकड़ना और कैद करना होता है। यहां तक कि हाजिरात के मौअक्कल जिन्नात को जला भी देते हैं। हाजिरात के अमल का तरीका इस प्रकार किया जाता है, जो पूरी तफ्सील के साथ उर्दू किताबों में मौजूद है।

  • हाजिरात का अमल संजीदा लोगों के बीच किया जाना चाहिए। उपस्थिति लोगों का वदन  इसलामी तरीके से ठीक तरह ढंका होना चाहिए। लड़की हो या लड़का, उपचार के वक्त उसके घर वालों को मौजूद रखा जाना चाहिए। लड़की को छूने से परहेज करना चाहिए। दुआ वगैरह पढ़कर दम करना हो तो बिना उसे छुए दूर से किया जाना चाहिए। 
  • जादू से प्रभावित बिछावन पर बैठे व्यक्ति के सामने दूसरे किनारे पर ठीक उसके सामने बैठ जाएं। हाजिरात शुरू करने से पहले जादू पीड़ित को अपना सिर ढंकने के लिए कहें और उसकी बगल में उसके किसी निकटतम रिश्तेदार को बैठा दें। यदि पीड़ित लड़की हो तो उसकी मां या भाई को बैठा दें। ताकि जिन्नाती हमले के बाद वह लुढ़क कर जमीन पर नहीं गिरे। 
  • पूरी तैयारी के बाद तीन मरतबा ‘आउजू-बिल्लाहि मिनश्-शैतार्नि-रजीम‘ कहें। उसके बाद सात मरतबा ‘बिस्मिल्लार्हि-रहमार्नि-रहीम‘ पढ़ें।
  •  फिर  कुरआन की कुछ सूरतें पढ़कर अपने ऊपर और सब लोगों पर हिसार बराय हिफाजत की नीयत से दम (फूंक) किया। इसके लिए दुरूद शरीफ, सूरा ए फातिहा, आयतल-कुर्सी, चार कुल, लाहौल काफी हैं। इसकी जानकारी नमाज की किताब में दी होती है।
  • इनके साथ अल्लाह के पाक नाम ‘या हफीजु या सलाम‘ और आयत ‘सलामुन कौलम्-मिर्रबिर्रहीम‘ को भी सात-सात बार पढ़ें।
  • इसके बाद अल्लाह से मदद की दुआ करें और हाजिरात की नीयत से ‘या रहमानु‘ पढ़ें। इसे 1000 बार पढ़ना है। इस दौरान इस पाक नाम के मौअक्कल के हाजिर होने के लिए कहते रहें। चंद लम्हों बाद ही वह पीड़ित पर हाजिरात हो जाएगा। उससे जादू-टोना करने वाले का नाम पूछें और मकसद जानें।  
  • जिन्नत का बर्ताव पीड़ित के हाव-भाव, बोली और हरकतों से मालूम हो जाएगा। तुरंत कुरआन की वे आयतें पढ़ें, जहां जहां अल्लाह ने अपने जालिम और सरकश बंदों को दर्दनाक सजा की खबर दी है। जैसे ही 11 बार  ‘सनुद-उज्जबानिया‘ (कुरआन 96, 18) पढ़ेंगे पीड़ित रोना शुरू कर देगा। बिछावन पर गिरकर तड़पने लगेगा। उसकी तडप से कष्ट का अंदाजा लग जाएगा। 
  • उसके बाद  ‘या रहमानु या रहमानु‘ पढ़ें और उसके ऊपर से जिन्न और जादू के असर के असर को खत्म करने का हुक्म दें। 

सात दिनों में जादू खत्म  

नीचे दिए गए दुआ के अमल से किसी भी तरह के जादू को सात दिनों में खत्म किया जा सकता है। उसके लिए किया जाने वाला दुआ और अमल का तरीका इस प्रकार है- 

दुआः अलीक मलीक-अंता-अल-इलफी कुलूबिहिम मलीक 

फिरवाना हामाना शाद्दा-दा नामरूदा

आरदा दक्यानूसार जीजूना मीजूना ला-ईना या माल उनाना 

फी नारी जन्नम दफा उम्मा-स्सियानी-अल खान्नसी मिन जुनूदी वाी इबलीसा।

  • दुआ की शुरूआत में सबसे अव्वल ताजा वुजू बना लें।
  • ऊपर दी हुई दुआ को पाक-साफ कागज पर लिख कर उसका पलीता यानि बत्ती बना लें। जैसे चिराग में जलाने के लिए बनाया जाता है।
  • इस कागज के पलीते को नीले रंग के धागे से लपेटकर उसके ऊपर पाक-साफ रुई भी लपेट दें।  
  • फिर एक मिट्टी के चिराग को पानी से धोकर पाक-साफ कर लें। कच्ची घानी सरसो के तेल से चिराग को भर दें। उसमें बत्ती डालकर अकेले कमरे में मगरिब या ईशा चिराग के पलिते को जलाएं। उस की एक टक निहारें। तबतक उसे निहारते रहें जबतक कि पलीता जलते-जलते नष्ट नहीं हो जाए। इस दौरान ‘बिस्मिल्लार्हि-रहमार्नि-रहीम‘ पढते रहें।़ इससे पहले दारूद शरीफ का 11 बार पढ़ लें। चिराग के बुझने पर भी दारूद शरीफ को 11 बार पढ़ें।
  • चिराग के बूझ जाने के बाद उसे संभाल कर रख दें। अगर कुछ जला हुआ बेकार सा कचरा हो जाये तो उसे किसी पाक-साफ जगह जैसे गमले या मिटटी में दफन कर दें या फिर पानी में भी बहा दें।
  • इस काम को  रोजाना सात दिनों तक करें। पलीता बनाएं और बिन किसी नागा के उसे चिराग में जलाएं।
  • इन्शा अल्लाह आप पर जो भी असरात या जादू है या बंदिश होगी वो अल्लाह सुब्हानहु वत’आला के करम से हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। अल्ला का जितना भी गुणगान करेंगे उतना ही अच्छा है। 
  • इस अमल को औरतें भी कर सकती हैं, लेकिन उनको यह हिदायत दी जाती है वे माहवारी के बाद पाक-साफ होकर इसे करें।

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