परेशानी दूर करने का वजीफा 5/5 (7)

परेशानी दूर करने का वजीफा

परेशानी दूर करने का वजीफा, जीवन की राह में पग-पग पर परेशानियां आती रहती हैं। इनसे कोई भी इंसान खुद को पूरी तरह से मुक्त नहीं हो सकता है। सभी परेशानियों से बचना आसान नहीं होता है।

छोटी-मोटी समस्याओं को तो सूझबूझ, ईमानदारी और परिश्रम से दूर कर लिया जाता है, लेकिन कुछ परेशानियों की ताकत का अंदाजा नहीं लग पाता है। नतीजा वैसी विकट मुसीबतों को जड़ समेत हटाने के लिए वजीफे या दुआ की अमल करनी चाहिए।

परेशानी दूर करने का वजीफा

परेशानी दूर करने का वजीफा

यह नहीं भूलना चाहिए कि मुसीबतें इम्तहान की तरह होती हैं। यदि किसी शख्स को कैसी भी परेशानी क्यों न हो उसे दुरूद शरीफ के अमल से दूर करने की पहल करनी चाहिए।

अल्लाह से अपने मसला बताकर दूर करने की मन्नत मांगनी चाहिए। इसके लिए दुरूदे-ए-पाक का वजीफा इस्तेमाल करना चाहिए। इसे निम्न तरह से पढ़ने के तरीके बताए गए हैं- 

    • दुरूदे -ए-पाक के फवाइन अक्सीर है। ऐसा फवाद है जिन्हें हम शुमार भी नहीं कर सकते हैं। परेशानी की वजह पता करने के बाद रात में इस वजीफे के अमल करना चाहिए।
    • जब आप परेशानियों से जूझ रहे हों और उसे दूर करने को कोई जरिया नहीं मिल पा रहा हो, तो रात में यानी कि 12 बजकर 45 मिनट पर के करीब जाग जाएं। उसके बाद तहारत वगैर से फारिग होकर वुजू बना लें। 
    • इसके बाद इत्मीनान के साथ दो रकत नमाज पढ़ें। सलाम फेरने के बाद काबा शरीफ की ओर रूख कर बैठ जाएं।
    • बैठे-बैठे ही दुरूदे-ए-शरीफ को 1000 मर्तबा पढ़ें।
    • पढ़ा जाने वाला आयात इस प्रकार है:- अल्लाहुम्मा सल्ली अला सय्यिदिना मुष्हम्मदिन सलातन तुहिल्लू बिहा उकूदती वतुफर्रिज बिहा कुरबती वतुकदी बिहा हाजती।
    • पढ़ना पूरा होने के बाद अल्लाताला से तहे दिल से मुसीबत या परेशानी का हल निकालने की दुआ मांगें।
    • इस अमल को एक ही रात करना चाहिए। फिर भी अगर मुसीबत खत्म नहीं हो पाई हो तो इस अमल को दूसरी रात में किया जा सकता है।
    • इस अमल को कोई भी स्त्री या पुरुष कर सकता है, लेकिन खवातीन अपनी पेरशानी दूर करने के लिए माहवारी के दौरान नहीं करें। 

जिस्मानी परेशानी  

अगर किसी व्यक्ति को जिस्मानी परेशानी हो। किसी भी तरह का दुख, दर्द या कोई तकलीफ हो तो उसे अपना दायां हाथ तकलीफ की जगह पर रखकर दिए गए दुआ को तीन बार विस्मिल्लाह पढ़ने के बाद सात बार पढ़े।

इसका अमल किसी भी समय में नमाज पढ़़ने और ताजा वजु करने के बाद करना चाहिए। दुआ इस प्रकार हैः- आअुजु बिल्न्लहि व कुदरतिही भिन शर्रे मा अजिदु व ओहजिरू।

हर परेशानी से निजात

हर तरह की परेशानी से निजात पाने के लिए नीचे दिए गए दुआ को रात मंे 101 बार पढ़ना चाहिए। और इसे प्रातः उठकर पांच लोगों को इसे पढ़कर सुनाना चाहिए। ऐसा तबतक करना चाहिए जबतक की परिशानी खत्म नहीं हो जाए। इसे पढ़ने से पहले किसी मौलवी से सही तरीके के बारे में मालुमात कर लेना चहिए। दुआ इस प्रकार हैः- ला इलाहा इल्ला अंता सुभानका इन्नी कुन्तु मिनज्जलिमीन।

मुसीबत के वक्त

कई बार कुछ मुसीबतें अचानक आ धमकती हैं। उसक वक्त इंसान का दिमाग ठीक से काम नहीं करता है। वह इतना परेशान हो जाता है कि कई दूसरी गलतियां कर बैठता है।

ऐसे वक्त के लिए रसूल अल्लाह ने फरमाया है कि किलमान पढ़ा करो। इससे अल्लाह की दुआ मिलती है और मुसीबत जैसे आती हैं, वैसे ही दूर भी हो जाती हैं। दुआ इस प्रकार हैः-  अल्लाहु, अल्लसहु रबी ला युश्रीका बही शय्या। इसके लिए इस तरह का क्रम से तरीका अपनाएं।

    • सबसे पहले आधी रात के वक्त घर के किसी एकांत में काबा की ओर मुंह कर नमाज पढ़ने के तरीके के अनुसार बैठ जाएं। 
    • ताजा वजु बना लें। उसके बाद कुरआन की आयत इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इजैयहि राजि ऊन को कम से कम 11 बार और अधिक से अधिक 100 बार पढ़ें।
    • इसके बाद दुआ को कम से कम सात बार और अधिक से अधिक 1000  मरतबा पढ़ें। दुआ हैः- अल्लाहुम्मा अजिरनी फी मुसीबती वखलुफ ली खैरम्मिनहा 
    • दुआ पढ़ने के बाद अल्लाताला से तहे दिल से अपनी मुसीबत को खत्म करने की आरजू करें। इस वजीफे को जबतक चाहे रोजान पढ़ सकते हैं। 
    • इससे औरतें भी अपनी व्यक्तिग मुसीबतों से छुटकारा हासिल कर सकती है, लेकिन उन्हें माहवारी के दौरन इस अमल को करने की सख्त मनाही है।  

बनी हुई परेशानी

भागदौड़ की जिंदगी में हर इंसान कई तरह की मुसीबतों का सामना करता है। कई बार ये मुसीबतें वक्त के साथ खत्म हो जाती हैं, कुछ मुसीबतें अर्से से बनी रहती हैं। यानी कि वक्त बीतता जाता है, लेकिन मुसीबतें हटने का नाम ही नहीं लेती हैं।

यदि आपकी कोई ऐसी ही मुसीबत लगातार बनी हुई है। खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है, तो मुसीबत से निजात पाने की दुआ का अमल कर सकते हैं। इसका अचूक असर होता है। 

यह नहीं भूलंे कि आपके लिए अल्लाह ने मुसीबतों और तकलीफ से छुटकारा दिलाने के लिए कुरआन पाक में फरमाया है कि जब आप मुसीबत से निजात का वजीफा पढ़़़ते हैं तब अल्लाह आपके हाल पर रहम फरमाते हैं और आपको आपकी परेशानी से आजाद कर देते हैं।

कहते हैं कि दिल से निकली यह दुआ सीधे अल्लाह ताला तक पहुंचती है। इसलिए इसे पूरी ईमानदारी से साफ नीयत से पढ़ें। इसमें इतनी ताकत है कि इससे कुछ ही वक्त में मुसीबत को खत्म हो जाती है। 

इसी तरह से यदि आपको लगता है कि आप किसी की बुरी नजर के शिकार हो गए हैं। उसी की वजह से परेशानी में हैं तो उदास या निरशा होने की जरूरत नहीं है। इस हाल में भी अल्ला आपको परेशानी से बाहर निकला देगा। दुआ के लिए सिलसिलेवार ढंग से तरीका इस प्रकार अपनाएं।

    • सबसे पहले किसी भी दिन रात के समय ताजा वजू कर लें।
    • उसके बाद इंशा के नमाज को पढ़ें और वजीफे को पढ़ना शुरू करें।
    • अल्लाह की सजदा करें और 100 मरतबा दुआ या अर-हमर रा हीमईन को पढ़ें। 
    • इसे तहे दिल और साफ नीयत से पर अल्ला ताला खुश हो जाते हैं।
    • यह वजीफा लगातार सात दिनों तक पढ़ें। जैसे-जैसे अमल के दिन बीतेंगे, वैसे-वैसे आपकी परेशानी दूर होती चली जाएगी।
    • इस अमल को करने को लेकर मन में कोई सवाल हो तो इस्लामी ज्योतिष और मौलवी से सलाह अवश्य करें। 

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