सिफली अमल की पहचान व काट 5/5 (7)

सिफली अमल की पहचान व काट

सिफली अमल की पहचान व काट, सिफली अमल मुस्लिम समाज का काफी प्रचिलत और खतरनाक काला जादू है। इसे इस्लामी तरीके से किया जाने वाला दूसरे किस्म के काले जादू की तुलना में सबसे खतरनाक, सबसे बड़ा और सबसे बुरा माना गया है।

सामान्यतः यह अमल किसी को तबाह-बर्बाद या परेशान करने,  धन-संपदा हथियाने , लड़कियांे के वशीकरण या किसी से दुश्मनी रखने के एवज में किया जाता है। वैसे प्यार पाने या प्रेमिका का दिल जीतने, यानी उसे अपने वश में करने के लिए इसका सकारात्मक इस्तेमाल भी किया जा सकता है। 

सिफली अमल की पहचान व काट

सिफली अमल की पहचान व काट

सिफली अमल का इस्तेमाल बेहद गंदी और बदवूदार चीजों से किया जाता है। इसका असर इस कदर जबरदस्त प्रभाव और नकारात्मक असर लिए होता है कि इसकी काट के लिए तांत्रिक या झाड़-फूंक करने वाले अच्छे-से-अच्छे जानकार भी हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। कारण इसे काटना कोई मामूली काम नहीं होता है।

फिर भी इसके काट के लिए सबसे पहली जरूरत असर की सटीक पहचान है। इसकी सही जानकारी सिफली अमल के स्पेशलिस्ट से मिल सकती है। इसकी पहचान और काट को बड़े हिफाजत और होशियारी से रूहानी इलाज किया जाता है। 

पहचानः कालो जादू के रूप् में सिफली अमल की पहचान पीड़ित के निम्न लक्ष्णों से की जा सकती हैः- 

    • पीड़ित व्यक्ति अजीब तरह की बदवू की शिकायत करता है, जिसे कोई दूसरा नहीं महससे करता है। शरीर मंे चींटियां रेंगने की भी शिकायत होती है।
    • आवाज में बदलाव आ जाता है, जो भारीपन लिए होता है। या फिर आवाज भर्राई हुई अस्पष्ट हो जाती है।
    • चेहरे की चमक यानी नूर उड़ जाती है। चेहरा एकदम से मुरझा जाता है।
    • पीड़ित नहाने से बचता रहता है। वह कई दिनों , यहां तक कि कई माह तक नहीं नहाता है।
    • मायूस और मजलूम बना हुआ तनहा रहना पसंद करता है। मन में कुछ भी करने की इच्छा नहीं होती है। उसका जिस्म एक चलती-फिरती लाश की तरह हो जाती है।
    • उसकी रूहानी और जिस्मानी ताकत, दोनों कमजोर हो जाती है। एक तरह से तमाम ख्चाहिशें और जिंदगी जीने की मुराद खत्म हो जाती है।    

काटः सिफली अमल की पहचान हो जाने के बाद निम्न तरीके से पीड़ित को इससे मुक्त किया जा  जा सकता हैंः- 

    • सिफली अमल की सामान्य असर होने की स्थिति में पीड़ित स्वयं भी इलाज कर सकते हैं, लकिन अधिकतर मामले मंे यह जानकार द्वारा ही करवाया जाना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले वुजू बना लीजिए।
    • नीचे दिए गए कुरआन-ए-पाक की आयत को एक पाक-साफ कागज पर अरबी में लिख लें। जो नहीं लिख सकते वे इसकी नकल कर सकते हैं, या फिर इसकी छपी हुई कापी साथ में रख सकते हैं। हालांकि हाथ से लिखा हुआ ही सबसे अधिक असरदार होता है।  आयत इस प्रकार हैः- इन्नमा स-न-ऊ कयदु साहिरिन वला युफलिहु-स-साहिरु ‘हयसु अता इन्नी अहव साना हुवा मा अबरा मूमा अ-ह-या अशरा हया। 
    • आयत लिखे कागज को अच्छी तरह से मोड़कर ताबीज बना लें और किसी कपड़े या थैली में हिफाजत से लपेट लें। उसे पीड़ित के गले में लिपटी हुई काले धागे के साथ बांध दें।
    • इस ताबीज के नापाक होने का विशेष ख्याल रखें तथा इसे तबतक गले में बंधा रहने दें जबतक कि राहत नहीं मिल जाए।
    • इससे पहले आयत को 101 बार अवश्य पढ़ें। 

कुरान से जादू की काट

काला जादू को खत्म करने के लिए कुरआन में दी गई आयत को तरीके के साथ पढ़ना चाहिए। कारण नियम और पूरी शिद्दत से कुरआन पढ़ना जादू के निवारण में बहुत प्रभावकारी होता है। क्योंकि कुरआन पढ़ने का जादू के निवारण में बड़ा प्रभाव है। उसका सिलसिलेवार अपनाया जाने वाला तरीका इस प्रकार हैः-

    • सिफली अमल जादू से पीड़ित व्यक्ति पर या फिर उसे साक्षी मानकर किसी बर्तन में आयतुल कुर्सी, तथा सूरतुल आराफ, सूरत यूनुस और सूरत ताहा में जादू से संबंधित आयतें पढ़ें। 
    • उनके साथ ही सूरतुल काफिरून, सूरतुल इख्लास और मुऔवजतैन (सूरतुल फलक और सूरतुन्नास) भी पढ़ा जाना चाहिए।
    • उसके बाद रोग निवारण अर्थात सिफली से मुक्ती और अच्छे स्वास्थ्य की दुआ की जानी चाहिए। की जाने वाली दुआ हैः- अल्लाहुम्मा रब्बन्नास, अज्हिबिल्बास वश्फि अन्तश्शाफी, ला शिफाआ इल्ला शिफाउक्, शिफाअन् ला युगादिरो सकमा।
    • इसी में से एक अन्य दुआ पढ़ने के बाद दम किया जाता है।था और वह दुआ यह हैः-बिस्मिल्लाहि अर्कीक, मिन कुल्ले शैइन यूश्जीक, व मिन शर्रे कुल्ले नफ्सिन् औ ऐनिन्हासिदिन् , अल्लाहु यश्फीक, बिस्मिल्लाहि अर्कीक।
    • इस दुआ को तीन बार दोहराएं और इसी तरह  से कुल हुवल्लाहु अहद् और मुऔवजतैन (सूरतुल फलक और सूरतुन्नास) को भी तीन-तीन मरतबा पढ़ें। दुआ के पढ़ते हुए तीनों बार एक गिलास पानी में दम करें यानी फूंक मारें। यह पानी सिफली अमल के उपचार में काम आएगा। उस पानी की कुछ घूंट पीड़ित व्यक्ति पिला दें और बचे पानी का नहाने वाले पानी में मिला दें। अल्लताल की दुआ से इसक असर दो दिनों में ही दिख जाएगा।

सिफली अमल की काट का गंडा-ताबीज

इस जादू की काट को एक खास ताबीज से संभव है, जिसे कागज पर लिखना बहुत आसान है। इसे बनाने और धारण करने का तरीका इस प्रकार हैः-

    • किसी भी रोज किसी भी समय में ताबीज बनाने के लिए 7, 9 या 11 सादा सफेद कगज लें। उसपर उतने ही उतने ही खानें बना लें। उस खाने में दाएं हाथ से सबसे ऊपर वाले खाने से लिखना शुरू कर बिस्मिल्लाह हीर रहमान निर रहीम अल्ला के नाम के साथ लिख दें।  
    • इसे जाफरीन के पानी से लिखें। वैसे सादे कलम से भी लिखा जा सकता है। 
    • लिखे कागज को रूई में लपेट कर बत्ती की तरह बना लें। ध्यान रहे बत्ती पतली बने।
    • उसके बाद किसी भी रोज इंशा की नमाज पढ़ने के बाद सरसों के तेल के साथ एक मिट्टी का चिराग जलाने की तैयारी करें। उसकी बाती के तौर पर ताबीज का इस्तेमाल करें। बाती को जला दें। 
    • यह सब पीड़ित के सामने ही करें और उसे जलते चिराग को गौर से देखने के कहें। वह उसे तबतक देखता रहे जबतक कि बाती पूरी जल नहीं जाती। उसके बाद चिराग को हिफजत से रख दें।
    • इस अमल को सात, नौ या ग्यारह दिनों तक बारी-बारी कागज के ताबीज के साथ करें। इंशा अल्ला की दुआ सात दिनों में ही कुबूल हो जाएगी।
    • इस उपाय को औरतें भी कर सकती हैं, लेकिन उन्हें माहवारी के दौरना चिराग को नहीं देखना चाहिए।

काला जादू के तोड़ की दुआ

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